Khari Khari News
News खेत-खलिहान हरियाणा

अब पराली जलाने की नही पड़ेगी जरुरत, किसान साथी करें इस विधि का प्रयोग

करनाल।हर साल पराली जलने की समस्या सरकार के लिए परेशानी खड़ी करने का काम करती है और सरकार इसकी रोकथाम हेतु प्रयास भी करती है। यहां तक की प्रशासन द्वारा किसानों पर मुकदमे भी दर्ज किए जाते हैं लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला।ऐसे में अब भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने इस समस्या के समाधान के लिए ऐसी विधि ईजाद की है जिसमें बिना खर्चे के पराली को खाद में बदला जा सकेगा। इस विधि के जरिए पराली को जैविक खाद में बदलने वाले कैप्सूल को पूसा डी कपोंजर का नाम दिया गया है। इस कीट की कीमत केवल 20 रुपए है जिसमें 4 कैप्सूल मिलते हैं।

कैसे काम करता है पूसा डी कपोंजर

 

डी कपोंजर एक बायोएंजाइम है ।इस कैप्सूल से तैयार किया गया घोल पराली को गला देता है। इतना ही नहीं इस डी कपोंजर के माध्यम से खेत में जैविक खाद भी तैयार होती है जो मिट्टी की उर्वरता शक्ति बढ़ाने का काम करेंगी। पराली पर इसके घोल का छिड़काव करके उसे मिट्टी में मिला दिया जाता है जिसके बाद जमीन में उसकी जैविक खाद तैयार हो जाती है।

घोल तैयार करने की विधि

घोल तैयार करने के लिए 150 ग्राम गुड़ लेकर उसे 5 लीटर पानी में उबाल लें।उसके बाद गुड़ की मैली उतार लीजिए और जब गुड़ का पानी हल्का गुनगुना रह जाएगा तब उसमें 50 ग्राम बेसन घोल दीजिए। इसके बाद आपको एक किट में जो 4 कैप्सूल मिलते हैं ,उन कैप्सूल को तोड़कर उस घोल में मिला दीजिए और साथ ही कैप्सूल के खोल भी उस में डाल दीजिए।

घोल को मिलाकर गर्म स्थान पर रखना होगा। 4 दिन में पूरी तरह से घोल तैयार हो जाएगा।अब इस घोल की मात्रा बढ़ाने के लिए 5 लीटर पानी में 150 ग्राम गुड़ फिर उबाल लीजिए और गुनगुना होने पर पहले से तैयार घोल में मिला दीजीए।5 किट कैप्सूल के साथ आप 25 लीटर घोल तैयार कर सकते हैं।

किस तरह से करें प्रयोग

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की वैज्ञानिक डॉ लवलीन शुक्ला ने बताया कि 1 एकड़ की पराली को खाद में बदलने के लिए 10 लीटर घोल की जरूरत पड़ती है। 10 लीटर घोल को 200 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें। बाद रोटावेटर से उसे मिट्टी में मिला दीजिए।इस बात का ध्यान रखें कि पराली मिट्टी में अच्छी तरह से दब जाएं। उसके बाद खेत में हल्के पानी की सिंचाई करें। लगभग 25 दिनों में 95% तक पराली गल जाती है। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया के बाद मिट्टी में कार्बन, नाइट्रोजन और फास्फोरस की बढ़ोतरी हो जाती है जिससे मिट्टी की उर्वरता शक्ति बढ़ती है।

कैसे मिलेगी कैप्सूल किट

हरियाणा में हर जिले के कृषि विज्ञान केन्द्र पर यह किट उपलब्ध कराई जाएगी। इस किट की कीमत केवल 20 रुपए रखी गई है। सुक्ष्म जीव विज्ञान विभाग द्वारा एक व्हाट्सएप नंबर 8587806977 जारी किया गया है जिस पर किसान  सुबह 9 से शाम 5 बजे तक मैसेज कर किट मंगवा सकते हैं।

Related posts

हरियाणा के कई जिलों में अभी अभी बारिश, देखें मौसम अल्पावधि अलर्ट ☔

kharikharinews

जींद में एंबुलेंस ड्राईवर के पदों पर निकली भर्ती, 10 वीं पास जल्द करें आवेदन

Mukshan Verma

राफेल विमान की दूसरी खेप पहुंचेगी भारत, फ्रांस से नॉन स्टॉप उड़ान भरकर भारत पहुंचेंगे राफेल विमान

kharikharinews

Leave a Comment