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तीन बार जुर्माना लगा तो जाएगी नौकरी, अफसरों कर्मचारियों पर कसा शिकंजा, जानिये

 

जनता के कामों को समय पर पूरा करने की बजाय लटकाए रखने वाले सरकारी अफसरों के लिए अब अपनी नौकरी बचानी मुश्किल हो जाएगी। क्योंकि हिसार पहुंचे सेवा अधिकार आयोग के मुख्य आयुक्त टीसी गुप्ता ने कहा कि अफसरों को अपनी कार्यशैली में सुधार करना होगा। फाइलें लटकाने या शिकायत को खारिज करने की बजाय उस पर काम करने की आदत बनानी पड़ेगी।

इसके साथ ही उन्होने कहा कि 31 अक्टूबर 2020 तक की सभी पेंडिंग फाइलें तुरंत निपटानी होंगी। अगर इसके बाद भी शिकायत मिली तो संबंधित अधिकारी से इस बारे में जवाब लिया जाएगा। जो भी अफसर 546 सेवाओं में किसी तरह की अनियमितता बरतता है तो उस पर 20 हजार का जुर्माना लगाया जाएगा। जिस अफसर पर तीन बार यह जुर्माना लग जाएगा, वह सरकारी सेवा के अयोग्य मान लिया जाएगा और फिर उसकी सरकारी सेवा खत्म करने की सिफारिश कर दी जाएगी।

मुख्य आयुक्त टीसी गुप्ता ने हैरानी जताते हुए कहा कि वाहन ट्रांसफर, मजदूर किसान की मौत पर दिए जाने वाले मुआवजे का जो काम 60 दिन में कर देना होता है। उसको भी चार-चार सालों से लटकाए रखा गया है। बिजली निगम, नगर निगम, समाज कल्याण विभाग, मैरिज सर्टिफिकेट, भवन निर्माण आदि के काम भी सालों तक लटकाए जाते हैं।

अब इस तरह की कार्यशैली से काम नहीं होगा। इसके लिए आयोग ने एक नई तरह की एप्लीकेशन तैयार कर दी है। अगर कोई भी कर्मचारी या अधिकारी किसी फाइल को निर्धारित समय पर पूरा नहीं करता है तो वह शिकायत एप्लीकेशन से खुद ही अगले स्टेज पर पहुंच जाएगी।

इस तरह से अगर कोई अफसर समय पर काम नहीं करता है तो उस पर जुर्माना लगाते हुए उसकी सेवा समाप्ति की सिफारिश कर दी जाएगी। इससे अपने आप ही पता लग जाएगा कि यह अफसर जनता की सेवा के लिए उपयुक्त नहीं है। इस बात का कोई असर नहीं होगा कि वह अफसर ट्रांसफर लेकर किस जिले में चला गया है।

31 विभागों की 546 सेवाओं के अलावा भी कई तरह के जरूरी कामों को जल्द ही सेवा नियमों के दायरे में लाया जाएगा। एक बच्चे से लेकर स्टूडेंट, किसान, दिव्यांग, विशेष वर्ग को जीवन के लिए किन-किन कामों की जरूरत पड़ती है, उसको भी सेवा अधिकार नियमों के दायरे में लाया जाएगा।

मुख्य आयुक्त टीसी गुप्ता ने कहा कि सेवा का अधिकार आयोग ने 2014 में काम करना शुरू किया था। जब उनको इस आयोग का जिम्मा सौंपा गया तो उन्होने देखा कि बीते 7 साल में केवल 7 अपीलें ही आयोग के पास पहुंची हैं। जबकि विभागों में आम लोगों के कामों से जुड़ी सवा लाख शिकायतें पेंडिंग थीं। इससे पता लग गया कि किस तरह से जनता के काम भी ठीक से नहीं किए जा रहे हैं।

आयोग तक उनकी शिकायतें पहुंचाने का चैनल भी ठीक से काम नहीं कर रहा है। आज के हालात देखें तो प्रदेश में हर रोज 600 शिकायतें सीएम विंडो पर दर्ज की जाती हैं। हम ऐसा सिस्टम करने जा रहे हैं कि अगर सुविधाओं से जुड़ी कोई शिकायत सीएम विंडो पर दर्ज की जाती है तो उससे संबंधित अधिकारी को सीधा नोटिस जारी कर दिया जाएगा।

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