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इनेलो की जींद रैली से परेशानी में हुड्डा परिवार, भूपेंद्र-दीपेेंद्र के इन नेताओं को जा रहे फोन

इनेलो की जींद रैली को लेकर हुड्डा परिवार परेशानी में

इनेलो में वापसी करने की संभावना वाले नेताओं को भूपेंद्र हुड्डा और दीपेंद्र हुड्डा कर रहे बार-बार फोन

कुलदीप श्योराण
चंडीगढ़। इनेलो की 25 सितंबर को जींद में होने वाले सम्मान दिवस रैली को लेकर अकेले दुष्यंत चौटाला ही “खौफजदा” नहीं है बल्कि उनके साथ साथ हुड्डा परिवार भी इनेलो की रैली को लेकर बेहद “परेशान” है।

हुड्डा परिवार इनेलो छोड़ चुके उन नेताओं को बार-बार फोन कर रहा है जिनके इनेलो में वापसी करने की संभावनाएं जताई जा रही हैं।

हुड्डा परिवार क्यों है परेशान ?

ओम प्रकाश चौटाला के जेल से बाहर आने से पहले तक भूपेंद्र हुड्डा ही हरियाणा की जाट पॉलिटिक्स में सबसे रोबदार चेहरे के तौर पर जगह बनाए हुए थे। ओम प्रकाश चौटाला के जेल चले जाने के बाद भूपेंद्र हुड्डा को जाट वोटरों में खुलकर घूमने का मौका मिला।
यह अलग बात है कि वह रोहतक, झज्जर और सोनीपत से बाहर के जाट वोटरों को अपने साथ लामबंद नहीं कर पाए।

मौजूदा हालात में दुष्यंत चौटाला जहां जाट समुदाय और किसान समुदाय की नाराजगी को झेल रहे हैं वही अभय चौटाला तमाम कोशिशों के बावजूद भूपेंद्र हुड्डा को पछाड़ नहीं पा रहे।

इस कारण बीजेपी के खिलाफ बने माहौल में जाट वोटरों के भूपेंद्र हुड्डा के साथ ही लामबंद होने की संभावनाएं नजर आ रही थी, लेकिन ओम प्रकाश चौटाला के बाहर जेल से बाहर आते ही पूरा माहौल चेंज हो गया।

ओम प्रकाश चौटाला के प्रदेशभर के दौरों के कारण हुड्डा परिवार को यह भय सताने लगा है कि अगर ओम प्रकाश चौटाला इसी तरह से सक्रिय पॉलिटिक्स करते रहे तो जाट वोटर उनके साथ लामबंद नहीं होंगे बल्कि पहले की तरह ओमप्रकाश चौटाला के साथ चले जाएंगे। इसलिए भूपेंद्र हुड्डा परिवार बेहद परेशान है।

हुड्डा परिवार किनको कर रहा फोन??
हुड्डा परिवार इनेलो की 25 सितंबर को जींद में होने वाली रैली को लेकर बेहद “चौकन्ना” है और ऐसे एक दर्जन नेताओं पर लगातार नजर रखे हुए हैं जो इनेलो बैकग्राउंड के हैं और किन्ही कारणों से इनेलो को छोड़ कर जा चुके हैं।

एक तरफ जहां अभय चौटाला और ओमप्रकाश चौटाला ऐसे नेताओं की “घर वापसी” करवाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं तो दूसरी तरफ हुड्डा परिवार ऐसे नेताओं को इनेलो से “दूर” रखने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहा है।

पूर्व वित्त मंत्री संपत सिंह, पूर्व मुख्य संसदीय सचिव रामपाल माजरा और उमेद सिंह लोहान जैसे एक दर्जन नेताओं के पास रोजाना भूपेंद्र हुड्डा परिवार या उनके खेमे से जुड़े हुए नेता फोन करके इनेलो में नहीं जाने क्या आग्रह कर रहे हैं।

ऐसे नेताओं को कहा जा रहा है कि जल्दी ही भूपेंद्र हुड्डा को कांग्रेस की पूरी खुली कमान मिल जाएगी और उसके बाद उनके लिए टिकट की कोई कोई चिंता नहीं होगी।

खरी खरी बात यह है कि इनेलो की 25 सितंबर को होने वाली रैली प्रदेश की सियासत में नए दौर का आगाज करेंगी। इनेलो को दोबारा मजबूत होने से जहां दुष्यंत चौटाला की जेजेपी को बड़ा “खतरा” पैदा होगा वहीं दूसरी तरफ भूपेंद्र हुड्डा की जाट पॉलिटिक्स की “केमिस्ट्री” भी खराब होगी।

इनेलो जैसे- जैसे मजबूत होती जाएगी वैसे वैसे हुड्डा परिवार का जाट वोटरों में असर कम होता जाएगा और हुड्डा परिवार इसके कारण कांग्रेस से अलग होकर अलग पार्टी भी नहीं बना पाएगा।

हुड्डा परिवार इसलिए इनेलो से जुड़े रहे नेताओं के पास लगातार फोन करके उन्हें इनेलो से दूर रहने की “गुजारिश” कर रहा है।
हुड्डा परिवार को यह लगता है कि कांग्रेस की कमान उनके हाथ में आने या अलग पार्टी बनाए जाने पर ऐसे जनाधार वाले नेता उनके साथ रहने बेहद “जरूरी” है।

अगर ये नेता इनेलो के साथ चले गए तो इनेलो फिर से “मजबूती” हासिल कर जाएगी जो उनके सियासी भविष्य के लिए नुकसानदायक रहेगा।

इसलिए हुड्डा परिवार इनेलो की जींद रैली को लेकर घबराया हुआ है और वहां जा सकने वाले नेताओं पर “डोरे” डालते हुए उन्हें अपने साथ जोड़े रखने की हर मुमकिन कोशिश कर रहा है।

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