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ऐलनाबाद उपचुनाव में कौन “कितने” पानी में, देखिये खरी खरी रिपोर्ट

काउंट डाउन- 33

ऐलनाबाद उपचुनाव में कौन “कितने” पानी में !!

इनैलो जीत की सबसे “प्रबल” दावेदार

कांग्रेस दे सकती है टक्कर “कांटेदार”

बीजेपी-जेजेपी गठबंधन के भविष्य का “टिकट” पर दारोमदार

कुलदीप श्योराण
ऐलनाबाद। 30 अक्टूबर को होने वाले ऐलनाबाद उपचुनाव को लेकर “बिगुल” बज चुका है। चौटाला परिवार के सबसे मजबूत गढ़ में जीत हासिल करने के लिए इनेलो, बीजेपी-जेजेपी गठबंधन और कांग्रेस तीनों ही कोई कोर “कसर” नहीं छोड़ेंगे।

ऐसे में सवाल ये उठता है कि 33 दिन बाद होने वाले उपचुनाव में कौन सी पार्टी जीत की कितनी “प्रबल” दावेदार है??
वर्तमान हालात में गहराई से विश्लेषण किए जाने पर तीनों ही पार्टियों का वर्तमान पड़ाव साफ-साफ नजर आ जाता है।

इनेलो जीत की सबसे प्रबल दावेदार

ऐलनाबाद उपचुनाव में जीत की सबसे “प्रबल” दावेदारी इनेलो की है। चौटाला परिवार के सबसे “मजबूत” गढ़ को भेदना बीजेपी-जेजेपी गठबंधन और कांग्रेस के लिए किसी भी तरह से आसान नहीं है।

कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन के समर्थन में अभय सिंह चौटाला द्वारा इस्तीफा दिए जाने के बाद इनेलो के “पक्ष” में पहले से बेहतर माहौल हुआ है।

2019 में बीजेपी के “75 पार” के नारे के बीच में भी अभय चौटाला लगभग 12000 वोटों से जीत दर्ज करने में सफल हुए थे।
अगर कोई बड़ा “उलटफेर” नहीं हुआ तो इनेलो ऐलनाबाद में 10 हजार से लेकर 30 हजार तक की जीत हासिल करने की संभावनाएं रखती है।

चौटाला परिवार में से कौन चुनावी दंगल में ताल ठोकेगा ??
बीजेपी -जेजेपी गठबंधन में से टिकट किसके हिस्से में आएगी??
कांग्रेस का प्रत्याशी कौन होगा??
यह तीनों ही चीजें ऐलनाबाद के चुनाव का परिणाम तय करेंगी।
अगर इनेलो ने जमीनी सच्चाई पर खड़े होकर चुनाव लड़ा तो उसकी जीत की राह में कोई “रोड़ा” नहीं अटक पाएगा।
ओम प्रकाश चौटाला की जेल से रिहाई के बाद दो इनेलो ऐलनाबाद की चुनावी जंग में “सबसे” मजबूत पोजीशन पर खड़ी नजर आती है।

बीजेपी बीजेपी गठबंधन के पास उम्मीदवार को लेकर बड़ी चुनौती

2014 और 2019 के विधानसभा चुनाव में ऐलनाबाद सीट पर बीजेपी ने अभय सिंह चौटाला को “कांटे” की टक्कर में फंसाए रखा। दोनों ही बार बीजेपी की तरफ से पवन बेनीवाल ने अभय सिंह चौटाला के सामने कड़ी चुनौती पेश की।

पवन बेनीवाल के बीजेपी छोड़ चले जाने के कारण बीजेपी के पास चौटाला परिवार को टक्कर देने के “लायक” कोई वर्तमान चेहरा नजर नहीं आता है।

अभी यह तो यह तय होना बाकी है कि बीजेपी और जेजेपी में से ऐलनाबाद उपचुनाव में कौन सी पार्टी चुनावी दंगल में उतरेगी।
जेजेपी चुनाव लड़ेगी तो इनेलो का रास्ता बेहद “आसान” हो जाएगा।

बीजेपी को मुकाबले में आने के लिए किसी “छुपे” हुए “रुस्तम” को चुनावी दंगल में उतारना होगा। वर्तमान नेताओं के बलबूते पर बीजेपी-जेजेपी गठबंधन तीसरे नंबर की लड़ाई लड़ेगा।

कांग्रेस की टिकट रहेगी निर्णायक

ऐलनाबाद उपचुनाव में कांग्रेस की जीत की संभावनाएं उसके प्रत्याशी पर “निर्भर” करेंगी।
कांग्रेस के पास पूर्व विधायक भरत सिंह बेनीवाल, पवन बेनीवाल और अमरजीत सिंह सिहाग के तौर पर तीन नेताओं की दावेदारी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुमारी शैलजा के लिए अपने पुराने कर्मक्षेत्र में इनेलो को “पछाड़ने” के लिए “सही” प्रत्याशी पर दांव लगाना “सबसे” महत्वपूर्ण है।

कांग्रेस की घर की महाभारत के बीच कुमारी शैलजा के लिए इस चुनाव को जीतना बेहद चुनौतीपूर्ण है। अगर कांग्रेसी यह उप चुनाव जीत गई तो शैलजा की अगुवाई का डंका बज जाएगा। ऐलनाबाद उपचुनाव में कांग्रेस की नंबर 1, 2 और 3 पोजीशन का “फैसला” प्रत्याशी का चयन करेगा। अगर कांग्रेस ने नापतोल कर प्रत्याशी उतारा तो बीजेपी-जेजेपी गठबंधन के खिलाफ बने हुए माहौल में कांग्रेस इनेलो के सामने कड़ी चुनौती देती हुई नजर आएगी।

खरी खरी बात यह है कि बीजेपी जेजेपी गठबंधन के पास मौजूदा नेताओं में से कोई भी ऐसा “चेहरा” नहीं है जो इनेलो और कांग्रेस के मुकाबले “सीधे” मुकाबले को “त्रिकोणीय” मुकाबले में बदल सके।

अगर गठबंधन सही प्रत्याशी को उतारने में नाकाम रहा तो इनेलो व कांग्रेस प्रत्याशी आमने-सामने की टक्कर में खड़े होंगे।
ऐलनाबाद का इतिहास, 2014 व 2019 के चुनाव परिणाम और ओमप्रकाश चौटाला की जेल से रिहाई इनेलो की जीत की दावेदारी को सबसे प्रबल बनाती है।

पवन बेनीवाल के शामिल होने के बाद कांग्रेस भी “उलटफेर” करने की संभावनाएं रखती है।
बीजेपी और जेजेपी के लिए ऐलनाबाद उपचुनाव में अपनी “साख” बचाना सबसे बड़ी चुनौती होगी। कोई “चमत्कार” ही गठबंधन को ऐलनाबाद में जीत का सरताज बना सकता है।

अब देखना ही है कि कांग्रेस और बीजेपी-जेजेपी गठबंधन इनेलो के “जबड़े” से जीत को “छीनने” के लिए चुनावी जंग में कौन से महारथियों पर दांव लगाते हैं। वर्तमान हालात में तो इनेलो ही सबसे आगे नजर आती है।

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